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भण्डार गाँव ग्राम पंचायत

भण्डार गाँव ग्राम पंचायत का अपना वेब पोर्टल

  • होम
  • इतिहास
    [smooth=id:1;] ग्राम पंचायत के अंदर दो गाँव आते है सेमलवाड़ी, जौल भौगोलिक यहाँ वैसे तो अधिकतर पहाड़ी इलाक़ा है लेकिन पाठरी एवं मैदानी भाग भी है जिन जगहों पर खेती होती है यहाँ पर जंगल अधिक होने के कारण लकड़ियों, जड़ी बूटी आदि का व्यपार अधिक होता है| पर्यटन स्थल पहाड़ी एवं जंगली होने के कारण यहाँ के स्थल पर्यटकों को अधिक लुभाते है अतः वर्ष भर यहाँ पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है चम्बा यहाँ का मुख्य पर्यटन स्थल है पर्यटन की वजह से यहाँ के लोगों को रोज़गार के अवसर प्राप्त होते है|
  • पंचायत
    ग्राम पंचायत भण्डार गाँव ग्राम प्रधान: श्रीमती पिंगला देवी सचिव: के.पी. मंमगईं पंचायत में कुल 5 वार्ड है पंचायत का सालाना बजट 1500000 लाख है पंचायत सदस्य श्री मकान सिंह श्री मस्तराम बडोनी श्रीमती सौला देवी
  • योजनाएँ
    पंचायत द्वारा ग्राम में निम्न प्रकार की योजनाएँ चलाई जा रही है| बी.पी.एल योजना: इस योजना के तहत ग्राम के 67 लोग लाभ उठा रहें है| कन्या विवाह योजना व्राद्धा पेंशन योजना विधवा पेंशन योजना इंदिरा आवास योजना छात्रव्रत्ति योजना विकास कार्य: ग्राम पंचायत के द्वारा ग्राम में हॅंडपंप, 100 ब्रक्षारोपण एवं भवन का निर्माण करवाया जा रहा है और समय-समय पर विकास कार्य होते रहते है|
  • शिक्षा
    ग्राम पंचायत में एक प्राइमरी विधालय, एक माध्यमिक विधालय एवं दो पौंड शिक्षा केंद्र, दो आंगॅनबाडी केंद्र है जहाँ पर बच्चों को शिक्षा प्रधान की जाती है यहाँ पर 15 अध्यापक, 8 अध्यापीकाएँ है| यहाँ पर 3 अध्यापक, 4 अध्यापिका एवं 28 छात्र, 35 छात्राएँ तथा एक प्रधानाचार्य हैं|
  • संसाधन
        प्राक्रतिक संसाधन: ग्राम पंचायत में कृषि योग्य भूमि, नदी, पहाड़ एवं जंगल आदि है|  व्यक्तिगत संसाधन: ग्राम पंचायत के अंदर आने वाले सभी गाँव में हॅंडपंप हैं| एवं पानी की टंकी सरकार द्वारा बनवाई गई है| सांस्कृतिक संसाधन: ग्राम पंचायत के द्वारा सांस्कृतिक भवन का निर्माण करवाया गया है इस भवन में 10 कुर्शी 1 टेबल, 1 दरी  है जिसमें पारंपरिक कार्यक्रम होते है जैसे रामलीला, होली मिलन समारोह,  एवं अन्य इसी तरह के कार्यक्रम किए जाते है| मानव संसाधन: ग्राम पंचायत में अधिकतर सभी लोगों के पास खेती है जिन लोगों के पास खेती नही है वे लोग दूसरों की खेती करते है और कुछ लोग नौकरी, मज़दूरी करके अपना और अपने घर का भारण पोषण करते है कुछ लोग सब्जी, फल, दुकान, आदि के छोटे व्यपार करते है| यहाँ पर मजदूरों की संख्या 35% प्रतिशत, किसानो की संख्या 50% प्रतिशत, नौकरी करने वालों की संख्या 15% प्रतिशत है| आने जाने के संसाधन: एक जगह से दूसरी जगह जाने आने के लिए सरकारी, प्राइवेट बसें, प्राइवेट गाड़ियाँ, एवं लोगो के पास अपने साधन भी है| यहाँ पर आने-जाने के लिए प्रदेश की सभी जगह से बस,  एवं व्यक्तिगत साधन मिलते है|
  • सुभिधाएँ
      स्वास्थ्य सम्बंधित: ग्राम पंचयत में एक  स्वास्थ्य केंद्र है पर इस स्वास्थ्य केंद्र में समय से डॉक्टर नही मिलते है| वैसे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर, दो नर्स एवं सफाई कर्मचारी है पर सफाई के नाम पर खाना पूर्ति की जाती है इन स्वास्थ्य केंद्रों पर एंबुलेंस की सुभिधा नही उपलब्ध है| ग्राम पंचायत में कुछ साधारण डॉक्टर, पारंपरिक दाई आदि है जिनसे तुरंत उपचार हो जाता है| पंचायत कार्यालय में पंचायत सचिव के द्वारा जन्म एवं मृतु प्रमाणपत्र बनाए जाते है तथा ये प्रमाणपत्र तहशील एवं स्वास्थ्य केंद्रों से भी प्राप्त किए जा सकते है| पानी: इस ग्राम पंचायत में पानी की समुचित व्यवस्था है हॅंडपंप, पानी की टंकी एवं पशुओं के लिए नदी आदि की व्यवस्था है| रहन- सहन सम्बंधित: ग्राम पंचायत में उच्च, मध्यमवर्गी लोगों के पास अपने पक्के मकान है जिन लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नही है उनके मकान भी पक्के बने हुए है पर उनकी स्थिति ठीक नही है एवं जिनके पास रहने के लिए घर नही है उनको ग्राम पंचायत की ओर से सामुदायिक भवन/इंदिरा आवास योजना के तहत घर बना कर दिए गये है|     ग्राम पंचायत की ओर से गॉव के सात लोगों को इंदिरा आवास के…
  • ग्राम दर्शन
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  • टिहरी गढ़वाल
    टिहरी गढ़वाल भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक जिला है। पर्वतों के बीच स्थित यह स्थान बहुत सौन्दर्य युक्त है। प्रति वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। यह स्थान धार्मिक स्थल के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है। यहां आप चम्बा, बुदा केदार मंदिर, कैम्पटी फॉल, देवप्रयाग आदि स्थानों में घूम सकते हैं। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती काफी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खिंचती है। टिहरी और गढ़वाल दो अलग नामों को मिलाकर इस जिले का नाम रखा गया है। जहाँ टिहरी बना है शब्दर ‘त्रिहरी’ से, जिसका मतलब है एक ऐसा स्थाचन जो तीन तरह के पाप (जो जन्मैते है मनसा, वचना, कर्मा से) धो देता है वहीं दूसरा शब्दत बना है ‘गढ़’ से, जिसका मतलब होता है किला। सन्‌ 888 से पूर्व सारा गढ़वाल क्षेत्र छोटे छोटे ‘गढ़ों’ में विभाजित था, जिनमें अलग-अलग राजा राज्य् करते थे जिन्हेंछ ‘राणा’, ‘राय’ या ‘ठाकुर’ के नाम से जाना जाता था। इसका पुराना नाम गणेश प्रयाग माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मालवा के राजकुमार कनकपाल एक बार बद्रीनाथ जी (जो आजकल चमोली जिले में है) के दर्शन को गये जहाँ वो पराक्रमी राजा भानु प्रताप से मिले। राजा भानु प्रताप उनसे…
  • उत्तराखंड
    खण्डाः पञ्च हिमालयस्य कथिताः नैपालकूमाँचंलौ। केदारोऽथ जालन्धरोऽथ रूचिर काश्मीर संज्ञोऽन्तिमः॥ (अर्थात हिमालय क्षेत्र में नेपाल, कुर्मांचल (कुमाऊँ) , केदारखण्ड (गढ़वाल), जालन्धर (हिमाचल प्रदेश), और सुरम्य कश्मीर पाँच खण्ड है। एक शिलाशिल्प जिसमें महाराज भगीरथ को अपने ६०,००० पूर्वजों की मुक्ति के लिए पश्चाताप करते दिखाया गया है।) पौराणिक ग्रन्थों में कुर्मांचल क्षेत्र मानसखण्ड के नाम से प्रसिद्व था। पौराणिक ग्रन्थों में उत्तरी हिमालय में सिद्ध गन्धर्व, यक्ष, किन्नर जातियों की सृष्टि और इस सृष्टि का राजा कुबेर बताया गया हैं। कुबेर की राजधानी अलकापुरी (बद्रीनाथ से ऊपर) बताई जाती है। पुराणों के अनुसार राजा कुबेर के राज्य में आश्रम में ऋषि-मुनि तप व साधना करते थे। अंग्रेज़ इतिहासकारों के अनुसार हुण, सकास, नाग, खश आदि जातियाँ भी हिमालय क्षेत्र में निवास करती थी। पौराणिक ग्रन्थों में केदार खण्ड व मानस खण्ड के नाम से इस क्षेत्र का व्यापक उल्लेख है। इस क्षेत्र को देव-भूमि व तपोभूमि माना गया है। मानस खण्ड का कुर्मांचल व कुमाऊँ नाम चन्द राजाओं के शासन काल में प्रचलित हुआ। कुर्मांचल पर चन्द राजाओं का शासन कत्यूरियों के बाद प्रारम्भ होकर सन १७९० तक रहा। सन १७९० में नेपाल की गोरखा सेना ने कुमाऊँ पर आक्रमण कर कुमाऊँ राज्य को अपने आधीन कर लिया। गोरखाओं का…
  • संपर्क केंद्र
      ग्राम पंचायत भंडार गॉव प्रधान: श्रीमती पिंगल देवी उम्र: 48 फ़ोन नंबर: 255754 मोबाइल नं० 9411184940 पोस्ट: चम्बा थाना: चम्बा जिला: टिहरी गढ़वाल पिन कोड नं०:249145

ग्राम दर्शन

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